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जंगल के किनारे एक छोटा सा बंदर रहता था। वह बहुत चंचल था, लेकिन उसके दिल में गहरा दुख छिपा था। उसकी माँ को इंसानों ने पकड़ लिया था, और वह अकेला रह गया। रोज़ वह उसी पेड़ पर बैठकर माँ का इंतज़ार करता। बाकी बंदर खेलते, पर उसका मन नहीं लगता। भूख लगती, फिर भी आँसू रुकते नहीं। समय बीत गया, पर माँ कभी लौटकर नहीं आई। अकेलापन उसका सबसे बड़ा दर्द बन गया।