Einsamer Affe sitzt nachts in einer regnerischen Stadtstraße
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शहर की एक गली में एक बंदर रहता था। जंगल कट चुका था, इसलिए वह इंसानों के बीच आ गया। रोज़ वह दुकानों के बाहर बैठकर खाना ढूंढता, पर ज़्यादातर लोग उसे भगाते थे। बच्चे पत्थर मारते, बड़े डराते। एक दिन तेज़ बारिश में सावन की ठंडी रात आई। बंदर कांपता रहा, उसे जंगल और माँ की याद आई। सुबह वह उसी गली में चुपचाप पड़ा मिला—जहाँ कभी कोई उसका नहीं था।