Fünf blaue Vögel fliegen gemeinsam im klaren Morgenhimmel
Eingabeaufforderung
नीले आसमान में पाँच नीले पक्षी हर सुबह एक साथ उड़ते थे। वे सिर्फ दोस्त नहीं थे—वे एक परिवार थे। सबसे बड़ा था नीरू, जो हमेशा आगे उड़कर रास्ता दिखाता। चिंकी सबसे छोटी थी, जो बादलों से बातें करती और हँसते-हँसते उड़ती। बुलबुल तेज़ थी, गोलू समझदार, और मीना सबसे दयालु।
एक दिन उड़ते-उड़ते उन्होंने नीचे जंगल में अजीब सन्नाटा देखा। न तो पत्ते सरसराए, न ही नदियाँ गुनगुनाईं। चिंकी बोली, “कुछ ठीक नहीं है।”
नीरू ने पंख मोड़े, “चलो देखें।”
जंगल के बीचों-बीच एक सूखा तालाब था। जानवर प्यासे थे, और बादल दूर भाग गए थे। मीना ने कहा, “अगर तालाब भर जाए, सब ठीक हो जाएगा।”
“पर पानी आएगा कैसे?” गोलू ने पूछा।
बुलबुल बिजली-सी उड़कर पहाड़ों की ओर गई, जहाँ बादल छुपे थे। उसने बादलों से गाया—मीठा, सच्चा गीत। मीना ने हवा को पुकारा, गोलू ने रास्ता बनाया, और नीरू ने सबको एक सुर में बाँधा। चिंकी ने तालाब के ऊपर गोल-गोल उड़कर उम्मीद जगाई।
धीरे-धीरे बादल लौटे। पहली बूँद गिरी, फिर दूसरी—और देखते ही देखते बारिश ने तालाब भर दिया। जंगल फिर से जीवित हो उठा। जानवरों की आँखों में चमक थी, पत्तों में गीत।
शाम को पाँचों पक्षी फिर आसमान में थे। चिंकी बोली, “आज हमने उड़कर नहीं, साथ रहकर जीत हासिल की।”
नीरू मुस्कुराया, “यही हमारी ताकत है।”
और तब से, जहाँ भी सन्नाटा होता, लोग कहते—नीले पक्षी आएँगे, और कहानी फिर से मुस्कुरा उठेगी। 💙