Schneller Hase rennt stolz durch einen dichten Wald
Eingabeaufforderung
एक जंगल में एक तेज़ दौड़ने वाला खरगोश रहता था। उसे अपनी रफ्तार पर बहुत घमंड था। वह हमेशा सब जानवरों का मज़ाक उड़ाता, खासकर कछुए का, जो बहुत धीरे चलता था।
एक दिन खरगोश ने कछुए से कहा,
“तुम तो इतने धीमे हो, कभी कहीं पहुँच ही नहीं पाओगे!”
कछुए को बुरा लगा, लेकिन वह शांत रहा। उसने कहा,
“अगर हिम्मत है तो मुझसे दौड़ की प्रतियोगिता कर लो।”
सब जानवर इकट्ठा हो गए और दौड़ शुरू हुई।
खरगोश तो बिजली की तरह आगे निकल गया। थोड़ी दूर जाकर उसने सोचा,
“कछुआ तो बहुत पीछे है, थोड़ा आराम कर लेता हूँ।”
यह सोचकर वह पेड़ के नीचे सो गया।
उधर कछुआ बिना रुके, धीरे-धीरे लेकिन लगातार चलता रहा।
जब खरगोश की नींद खुली, तब तक कछुआ मंज़िल के बहुत पास पहुँच चुका था।
खरगोश ने पूरी ताकत से दौड़ लगाई, लेकिन कछुआ जीत चुका था।
सब जानवर खुश हो गए और खरगोश शर्मिंदा हो गया।
सीख:
👉 घमंड नहीं करना चाहिए।