Junger Dorfjunge rennt entschlossen über eine Aschenbahn
Eingabeaufforderung
एक छोटे से गाँव में आरव नाम का लड़का रहता था। उसके पापा खेत में काम करते थे और माँ घर संभालती थी। घर की हालत अच्छी नहीं थी, लेकिन आरव के सपने बहुत बड़े थे।
आरव रोज़ स्कूल जाता, लेकिन उसके पास न तो अच्छे जूते थे, न नया बैग। फिर भी वो हमेशा मुस्कुराता रहता। जब भी कोई पूछता, “इतना खुश क्यों रहता है?”
वो कहता, “क्योंकि मेरे पास सपना है।”
गाँव में एक दिन दौड़ प्रतियोगिता रखी गई। शहर के बच्चे भी आए। सबके पास अच्छे जूते, स्पोर्ट्स ड्रेस और तैयारी थी। आरव के पास कुछ भी खास नहीं था।
दौड़ शुरू हुई। शुरुआत में आरव पीछे रह गया। लोग हँसने लगे।
पर तभी उसे अपने पापा की बात याद आई —
“बेटा, थकना मत… कोशिश आख़िरी सांस तक करना।”
आरव ने पूरी ताकत लगा दी। उसके पैर दर्द कर रहे थे, सांस तेज़ चल रही थी, लेकिन वो रुका नहीं।
और आख़िर में… वो सबको पीछे छोड़कर पहले नंबर पर आ गया।
सब हैरान थे।
आरव मुस्कुराकर बोला —
“जीत जूतों से नहीं, हिम्मत से होती है।”
उस दिन पूरे गाँव को समझ आया —
सपना छोटा हो या बड़ा, अगर हिम्मत सच्ची हो तो जीत पक्की है। ✨