Ältere Frau geht mit einer kleinen Ziege durch ein Dorf
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बकरी और बूढ़ी अम्मा की कहानी
एक छोटे से गाँव में एक बूढ़ी अम्मा रहती थीं। उनका कोई अपना नहीं था। उनका एक छोटा सा कच्चा घर था और घर के बाहर एक नीम का पेड़। अम्मा बहुत गरीब थीं, लेकिन उनका दिल बहुत अमीर था।
एक दिन अम्मा को रास्ते में एक छोटी सी बकरी मिली। बकरी बहुत कमजोर थी और कांप रही थी। अम्मा को उस पर दया आ गई। उन्होंने प्यार से कहा,
“अरे बेचारी, तू कितनी कमजोर है। चल, मेरे साथ चल।”
अम्मा उसे घर ले आईं। उन्होंने उसे पानी पिलाया, थोड़ा सा सूखा चारा दिया और उसके सिर पर हाथ फेरा। बकरी को बहुत अच्छा लगा। उस दिन से बकरी अम्मा के साथ रहने लगी।
दिन बीतते गए। अम्मा बकरी को अपनी बेटी की तरह प्यार करती थीं, और बकरी भी अम्मा से बहुत प्यार करती थी। वह हमेशा अम्मा के पीछे-पीछे घूमती रहती।
एक दिन अम्मा बीमार पड़ गईं। वे उठ भी नहीं पा रही थीं। बकरी यह देख कर बहुत परेशान हो गई। वह जंगल की तरफ भागी और वहाँ से कुछ हरी-हरी घास लेकर आई। उसने अम्मा के पास बैठकर “में…में…” की आवाज़ की, जैसे कह रही हो, “अम्मा, आप ठीक हो जाओ।”
गाँव के एक आदमी ने यह देखा। उसे अम्मा की हालत पर दया आई। उसने गाँव वालों को बुलाया। सब लोग आए और अम्मा की मदद की। कुछ ने दवा दी, कुछ ने खाना दिया।
कुछ दिनों में अम्मा ठीक हो गईं। उन्होंने बकरी को गले लगाया और कहा,
“तू सिर्फ बकरी नहीं, मेरी सच्ची दोस्त है।”
उस दिन से गाँव वाले भी अम्मा और बकरी का ध्यान रखने लगे।