Niño pobre de aldea estudiando de noche junto a una pequeña lámpara
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रामू एक गरीब गाँव का लड़का था, पर उसके सपने बहुत बड़े थे। दिन में खेतों में काम करता और रात को दीपक की रोशनी में पढ़ाई करता। मेहनत और लगन से वह गाँव का पहला शिक्षक बना। उसने बच्चों को शिक्षा का महत्व सिखाया और गाँव में पहली पाठशाला खोली। समय बीतता गया, पर रामू का जोश नहीं थमा। सौ साल की उम्र में भी वह बच्चों को पढ़ाता रहा। जब उसका जन्मदिन आया, पूरा गाँव खुशी से झूम उठा। सबने कहा — “रामू सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि गाँव की रौशनी है।”