Anciano sentado en los fríos escalones de un templo antiguo
Prompt
सुबह बहुत शांत थी।
पुराने मंदिर की सीढ़ियाँ ठंडी थीं।
एक बूढ़ा आदमी धीरे-धीरे आकर बैठ गया।
उसकी उम्र बहुत हो चुकी थी।
आँखें सामने देखती थीं,
पर मन कहीं और था।
वह बुदबुदाया —
“अब कोई बात सुनने वाला नहीं रहा…”
उसी समय,
मंदिर के पीछे से
एक बूढ़ा बंदर आया।
वह कूदा नहीं।
दौड़ा नहीं।
बस आकर
आदमी के पास बैठ गया।
दोनों चुप थे।
हवा चली।
पीपल के पत्ते हिले।
पर किसी ने कुछ नहीं कहा।
आदमी ने बंदर की ओर देखा और धीमे से बोला —
“तू रोज़ आता है…
अच्छा लगता है।”
बंदर ने उसकी तरफ देखा।
और वहीं बैठा रहा।
उस दिन,
मंदिर की सीढ़ियों पर
दो अकेले लोग बैठे थे —
पर
दोनों अकेले नहीं थे।