Singe espiègle en vêtements humains marchant dans un marché de la ville
Prompt
एक समय की बात है, एक नटखट बंदर था जिसका नाम मोंटी था। मोंटी कोई साधारण बंदर नहीं था — उसे इंसानों की तरह कपड़े पहनने का बड़ा शौक था। एक दिन उसने रंग-बिरंगी टी-शर्ट, नीली पैंट और चमकदार जूते पहन लिए। आईने में खुद को देखकर वह बोला,
“वाह! आज तो मैं पूरा हीरो लग रहा हूँ!”
मोंटी शहर के बाज़ार की ओर निकल पड़ा। बाज़ार में लोग उसे देखकर हैरान रह गए। बच्चे हँसने लगे, दुकानदार मोबाइल निकालकर फोटो खींचने लगे, और कुछ लोग तो सोचने लगे कि कहीं यह किसी फिल्म की शूटिंग तो नहीं।
मोंटी इतराते हुए इधर-उधर घूम रहा था। उसने एक फल वाले की दुकान देखी और बोला,
“भैया, एक केला देना!”
फल वाला चौंक गया — बोलने वाला बंदर! लेकिन उसने मुस्कुराकर केला दे दिया।
तभी अचानक एक कुत्ता भौंकता हुआ उसकी ओर दौड़ा। मोंटी डर गया और भागते-भागते एक ठेले से टकरा गया। उसकी टोपी उड़ गई, जूता निकल गया और लोग ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे। मोंटी को थोड़ा शर्म आया, लेकिन फिर वह खुद भी हँस पड़ा।
उसने सोचा —
“कपड़े पहनने से कोई इंसान नहीं बन जाता, असली मज़ा तो अपने जैसे रहने में है।”
यह सोचकर उसने जूते हाथ में उठाए, पेड़ पर छलांग लगाई और खुशी-खुशी जंगल लौट गया।
सीख: दिखावा करने से अच्छा है, जैसे हो वैसे ही खुश रहो।