Vieille femme poursuivant un chien affamé avec un pain plat volé
Prompt
यह एक बहुत ही प्रसिद्ध और मनोरंजक लोककथा है, जिसे "बुढ़िया और कुत्ते की कहानी" या "बुढ़िया की रोटी" के नाम से जाना जाता है। यह कहानी हमें सिखाती है कि कैसे चतुराई और थोड़ी सी सावधानी से हम अपना काम बना सकते हैं।
यहाँ उस कहानी का एक संक्षिप्त और मजेदार रूप है:
बुढ़िया की रोटी और चालाक कुत्ता
एक बार की बात है, एक बूढ़ी दादी माँ अपने घर में बड़े चाव से बाजरे की रोटी बना रही थीं। उन्होंने ताज़ी रोटी बनाई और उसे एक थाली में रख दिया। तभी वहाँ एक भूखा कुत्ता आया और मौका पाकर रोटी मुँह में दबाकर भागने लगा।
बुढ़िया चिल्लाई— "अरे! अरे! रोटी ले गया!" लेकिन कुत्ता कहाँ रुकने वाला था? वह तो सरपट दौड़ पड़ा।
पीछा और चतुराई
बुढ़िया भी कम नहीं थी। वह लाठी लेकर कुत्ते के पीछे दौड़ी, लेकिन दौड़ते-दौड़ते जब वह थक गई, तो उसने देखा कि कुत्ता एक पेड़ के नीचे बैठकर बड़े आराम से रोटी खाने की तैयारी कर रहा है।
बुढ़िया को समझ आ गया कि वह कुत्ते को दौड़कर नहीं पकड़ पाएगी। उसने अपनी चतुराई का इस्तेमाल किया। वह वहीं रुक गई और बड़े प्यार से बोली:
"अरे बेटा! सूखी रोटी क्यों खा रहा है? रुक, मैं दौड़कर गुड़ और घी ले आती हूँ, थोड़ा चुपड़ कर खाना, तब ज़्यादा स्वाद आएगा!"
परिणाम
कुत्ता बेचारा सीधा-सादा (और थोड़ा लालची) था। उसने सोचा, "बात तो सही है, घी-गुड़ वाली रोटी ज़्यादा अच्छी लगेगी।" वह रुक गया और बुढ़िया के वापस आने का इंतज़ार करने लगा।
इतने में बुढ़िया ने पास पहुँचकर अपनी लाठी हवा में लहराई। कुत्ता समझ गया कि घी-गुड़ नहीं, बल्कि डंडा मिलने वाला है! वह डर के मारे रोटी वहीं छोड़कर नौ दो ग्यारह हो गया। बुढ़िया ने अपनी रोटी उठाई, उसे साफ़ किया और मजे से खाई।
कहानी की सीख (The Moral)
धीरज न खोएं: मुश्किल वक्त में घबराने के बजाय दिमाग का इस्तेमाल करना चाहिए।
लालच बुरी बला है: कुत्ते ने घी-गुड़ के लालच में हाथ आई रोटी भी खो दी।
क्या आप इस कहानी का कोई खास क्षेत्रीय संस्करण (जैसे किसी विशिष्ट बोली में) सुनना चाहते हैं, या मैं इस पर एक मजेदार कविता लिख दूँ?