Semplice scena d'interni con alcuni giocattoli sparsi
Prompt
ही खेलने के खिलौने। उसके पिता खेतों में मज़दूरी करते थे और माँ घरों में काम करती थी। फिर भी रामू बहुत मेहनती और ईमानदार था।
रामू रोज़ सुबह उठकर पढ़ाई करता और फिर स्कूल पैदल जाता। रास्ते में लोग उसका मज़ाक उड़ाते, लेकिन रामू कभी हिम्मत नहीं हारता। वह सोचता,
“मेहनत से ही ज़िंदगी बदलती है।”
एक दिन गाँव के स्कूल में एक प्रतियोगिता हुई। रामू ने पूरी मेहनत से पढ़ाई की और पहला इनाम जीत लिया। मास्टर जी ने उसकी तारीफ़ की और कहा,
“गरीबी कोई कमजोरी नहीं, मेहनत कमजोरी को ताक़त बना देती है।”
समय के साथ रामू पढ़-लिखकर बड़ा अफसर बना। उसने अपने माँ-बाप और गाँव के गरीब बच्चों की मदद की।