Umile contadino accanto a una capanna crepata in una foresta magica
Prompt
बहुत दूर, पहाड़ों और चमकते जंगलों के बीच एक अनोखी दुनिया थी, जिसे लोग उजाला लोक कहते थे। वहाँ हवा में जादू था और पेड़ों से धीमी रोशनी निकलती थी। उसी दुनिया के किनारे एक टूटी-फूटी झोपड़ी में एक गरीब किसान रहता था। उसका नाम धीरू था।
धीरू के पास न सोना था, न बड़ी ज़मीन। उसकी झोपड़ी की छत टपकती थी और दीवारें दरारों से भरी थीं। फिर भी वह हर सुबह मुस्कान के साथ उठता और अपने छोटे से खेत में मेहनत करता। वह कहता,
“मेहनत और सच्चाई ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है।”
एक दिन उजाला लोक में अजीब हलचल हुई। जादुई रोशनी, जिससे पूरी दुनिया चलती थी, धीरे-धीरे बुझने लगी। राजा और जादूगर भी परेशान हो गए, लेकिन कोई हल नहीं मिल रहा था।
तभी एक बूढ़े पेड़ की आत्मा ने कहा,
“इस दुनिया को वही बचा सकता है, जिसका दिल साफ और निस्वार्थ हो।”
सब लोग अमीरों और ताकतवरों को देखने लगे, लेकिन रोशनी और भी कम होती गई। तब किसी ने उस गरीब किसान धीरू का नाम लिया।
धीरू को राजमहल बुलाया गया। उसने डरते-डरते सच कहा,
“मेरे पास जादू नहीं है, बस सच्चा दिल है।”
उसे जादुई जंगल के बीच एक बुझते दीपक तक भेजा गया। शर्त यह थी कि दीपक तभी जलेगा जब कोई अपने लिए नहीं, दूसरों के लिए चाहे।
धीरू ने दीपक के सामने आँखें बंद कीं और बोला,
“अगर यह दुनिया बच सकती है, तो मेरी झोपड़ी और मेरा दुख ले लो।”
अचानक तेज रोशनी फैल गई। दीपक जल उठा और पूरा उजाला लोक चमकने लगा।
राजा ने धीरू को महल और धन देना चाहा, लेकिन धीरू ने कहा,
“मुझे बस मेरी झोपड़ी ठीक कर दीजिए और सबको मेहनत का सम्मान करना सिखाइए।”
उस दिन से उजाला लोक में गरीब और अमीर का भेद खत्म हो गया। धीरू अपनी छोटी-सी पक्की झोपड़ी में खुश रहने लगा, और पूरी दुनिया उसे
“सच्चे दिल वाला किसान” कहकर याद करने लगी।