Ragazzino davanti a una semplice casa in un piccolo villaggio di montagna
Prompt
छोटे से पहाड़ी कस्बे सूरजपुर में एक लड़का रहता था — नाम था रामू। उम्र कोई दस साल, पर सपने आसमान से भी बड़े। रामू के बाल हमेशा बिखरे रहते, जैसे हवा से दोस्ती हो, और उसकी आँखों में हर वक्त कुछ नया जानने की चमक रहती थी।
रामू का घर कस्बे के आख़िरी छोर पर था — मिट्टी की दीवारें, टीन की छत और सामने एक पुराना नीम का पेड़। उसके पापा स्टेशन पर कुली थे और माँ सिलाई का काम करती थीं। घर में ज़्यादा सामान नहीं था, लेकिन हँसी और कहानियों की कोई कमी नहीं थी।
रामू को सबसे ज़्यादा मज़ा आता था कबाड़ में से चीज़ें जोड़कर कुछ नया बनाना। टूटी घड़ी, पुराना बल्ब, जंग लगी तार — उसके लिए ये सब खजाने थे। लोग कहते,
“अरे रामू, इससे कुछ नहीं बनता!”
पर रामू मुस्कुरा कर कहता,
“अभी नहीं… पर बनेगा ज़रूर।”