Scimmia curiosa che osserva i villaggiatori al limitare della foresta
Prompt
एक घने जंगल के किनारे बसे छोटे से गाँव में मेरी—एक शरारती बंदर की—नज़र अक्सर दो इंसानों पर जाती थी: जीतू और प्रियंका। अब मैं हूँ जंगल का सबसे जिज्ञासु बंदर, तो भला उनकी कहानी बताए बिना कैसे रहूँ? 🐒
मैं रोज़ आम के पेड़ पर बैठकर सब देखता था। जीतू सुबह-सुबह साइकिल से आता, और प्रियंका कुएँ पर पानी भरने। पहले-पहल दोनों बस एक-दूसरे को चुपके से देखते थे। अरे, मैं तो ऊपर से साफ़-साफ़ देख लेता था! उनकी आँखों में कुछ-कुछ तो चल रहा था।
एक दिन मैंने सोचा, थोड़ा मसाला डालूँ। जैसे ही प्रियंका ने अपना दुपट्टा पेड़ की डाल पर रखा, मैंने झट से उठा लिया और ऊपर चढ़ गया। जीतू बेचारा घबरा गया, और बहादुरी दिखाते हुए पेड़ पर चढ़ने लगा। प्रियंका नीचे से हँस रही थी। मैंने दुपट्टा वापस फेंक दिया, पर उस दिन दोनों पहली बार खुलकर हँसे… और बात भी की।
फिर तो रोज़ का सिलसिला बन गया। मैं कभी उनकी चिट्ठी इधर से उधर पहुँचाने में “अनजाने में” मदद कर देता, कभी दोनों के मिलने का पहरेदार बन जाता। जब गाँव वालों की आहट होती, मैं जोर से चिल्ला देता—“कीं-कीं!” ताकि उन्हें खबर हो जाए।
धीरे-धीरे उनकी दोस्ती प्यार में बदल गई। जीतू ने एक दिन उसी आम के पेड़ के नीचे प्रियंका से कहा, “मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहना चाहता हूँ।” और मैं ऊपर से तालियाँ बजा रहा था—हाँ भई, बंदर भी खुश होते हैं!
आख़िरकार, परिवारों की रज़ामंदी से दोनों की शादी हो गई। उस दिन मैंने सबसे ज़्यादा केले खाए—जश्न जो मनाना था! 🍌
तो बच्चों, ये थी जीतू और प्रियंका की लव स्टोरी, एक बंदर की नज़र से। अगर मैं न होता, तो शायद ये कहानी इतनी मज़ेदार न होती… क्या कहते हो? 🐒💕