बहुत दूर तक फैला एक सुनसान रेगिस्तान था।
रेत के टीले सूरज की आग में तप रहे थे।
उसी रेगिस्तान में एक बंदर भटक गया था।
वह जंगल से गलती से यहाँ आ पहुँचा था।
उसके गले सूख रहे थे।
आँखों में डर साफ़ दिख रहा था।
वहीं दूसरी ओर एक इंसान भी फँसा था।
उसका नाम अर्जुन था।
वह एक यात्री था।
रास्ता भटक जाने से रेगिस्तान में आ गया था।
उसके पास पानी बहुत कम बचा था।
सूरज सिर के ठीक ऊपर था।
गर्म हवा चल रही थी।
अर्जुन थककर एक टीले के पास बैठ गया।
तभी उसकी नज़र बंदर पर पड़ी।
बंदर उसे देखकर डर गया।
वह पीछे हटने लगा।
अर्जुन ने धीरे से हाथ उठाया।
उसने कोई नुकसान नहीं किया।
उसकी आँखों में भी वही डर था।
बंदर यह समझ गया।
दोनों एक-दूसरे को देखने लगे।
भाषा अलग थी।
पर दर्द एक जैसा था।
बंदर ने अपने सूखे होंठ चाटे।
अर्जुन ने अपनी बोतल देखी।
उसमें थोड़ा सा पानी था।
उसने सोचा क्या करे।
फिर उसने ढक्कन खोला।
थोड़ा पानी रेत पर डाला।
बंदर पास आया।
उसने पानी पिया।
उसकी आँखों में चमक आई।
उसने अर्जुन की ओर देखा।
जैसे धन्यवाद कह रहा हो।
अर्जुन मुस्कुराया।
दोनों साथ बैठ गए।
शाम होने लगी।
ठंडक धीरे-धीरे बढ़ी।
रात का डर सामने था।
रेगिस्तान रात में और खतरनाक होता है।
बंदर ने इधर-उधर देखा।
वह कुछ खोज रहा था।
अचानक वह दौड़ा।
अर्जुन चौंका।
बंदर एक दिशा में इशारा करने लगा।
वह आवाज़ें निकाल रहा था।
जैसे कह रहा हो “चलो”।
अर्जुन ने भरोसा किया।
दोनों चल पड़े।
रेत में पैर धँस रहे थे।
चाँद निकल आया।
रास्ता थोड़ा दिखने लगा।
बंदर आगे-आगे था।
वह बार-बार पीछे देखता।
अर्जुन उसका पीछा करता।
काफी देर बाद
उन्हें कुछ पेड़ दिखे।
अर्जुन की आँखें चमक उठीं।
वह एक नखलिस्तान था।
वहाँ पानी था।
हरियाली थी।
दोनों ने राहत की साँस ली।
अर्जुन ने पानी पिया।
बंदर ने भी खूब पानी पिया।
अर्जुन बैठ गया।
उसने बंदर को देखा।
बोला, “तुमने मेरी जान बचाई।”
बंदर ने सिर हिलाया।
जैसे समझ गया हो।
रात वहीं बिताई।
तारे बहुत पास लग रहे थे।
सुबह सूरज निकला।
अब रास्ता साफ़ था।
दूर ऊँटों की आवाज़ आई।
एक काफिला आ रहा था।
अर्जुन ने हाथ हिलाया।
लोग रुके।
उन्होंने मदद की।
अर्जुन सुरक्षित था।
बंदर पेड़ पर चढ़ गया।
वह जाने की तैयारी में था।
अर्जुन ने उसे देखा।
मन भारी हो गया।
उसने कहा, “दोस्त, धन्यवाद।”
बंदर नीचे उतरा।
उसने अर्जुन का कंधा छुआ।
फिर जंगल की ओर भाग गया।
अर्जुन उसे देखता रहा।
जब तक वह ओझल न हो गया।
काफिला आगे बढ़ा।
अर्जुन पीछे मुड़ा।
रेगिस्तान अब भी वैसा ही था।
पर वह बदल चुका था।
उसने सीखा था।
इंसान और जानवर में