मैं जंगल में रहने वाला एक बंदर हूँ और मेरे दो छोटे-छोटे बंदर हैं—चिंटू और मिंटू। मैं उनका पापा हूँ। दोनों छोटे हैं, लेकिन बहुत मेहनती हैं और काम करते हैं।
चिंटू रोज़ सुबह जल्दी उठकर पेड़ों से फल इकट्ठा करता है। वह फुर्ती से एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर कूदता है और सबके लिए ताज़े फल लाता है। मिंटू का काम थोड़ा अलग है। वह जंगल के जानवरों तक खबरें पहुँचाता है—कहाँ पानी मिला है, कहाँ बारिश हुई है और कहाँ खतरा है।
शाम को हम तीनों साथ बैठते हैं। मैं उनसे उनके दिन के बारे में पूछता हूँ और दोनों खुशी-खुशी अपनी बातें बताते हैं। मैं मुस्कराकर कहता हूँ,
“मेरे बच्चे सिर्फ बंदर नहीं, जिम्मेदार बंदर हैं।”
फिर हम तीनों केले खाते हैं, हँसते हैं और खुशहाल जीवन जीते हैं।