सना एक छोटे से गाँव में रहती थी। घर गरीब था लेकिन उसके सपने बड़े थे। दिन में सिलाई करती और रात में छोटे दीये की रोशनी में पढ़ाई करती। लोग हँसते थे, पर वह नहीं रुकी। सालों बाद वह अध्यापिका बनी और लड़कियों के लिए मुफ्त स्कूल खोला। वही दीया अब पूरे गाँव की ज़िंदगी रोशन कर रहा था।