एक ठंडी रात में एक मां और उसकी छोटी बेटी शहर की फुटपाथ पर बैठे थे। मां दिनभर भीख मांगकर दो सूखी रोटियां लाई थी। बेटी मुस्कुराकर बोली, “मां, हम भी एक दिन अच्छा घर बनाएंगे।” मां ने उसे सीने से लगा लिया। गरीबी थी, पर उम्मीद जिंदा थी। दोनों एक-दूसरे का सहारा बनकर हर मुश्किल झेलते रहे।