गाँव के किनारे एक पुराने बरगद के पेड़ पर दो छोटे-छोटे बंदर रहते थे। उनके नाम थे चिंटू और मिंटू। दोनों के शरीर पर कटे-फटे कपड़े लिपटे रहते, जो उन्हें किसी ने दया से दे दिए थे। ठंडी हवा चलती तो वे एक-दूसरे से लिपटकर रात बिताते। पेट भरने को कभी सूखी रोटी मिलती, कभी सिर्फ पानी पीकर सोना पड़ता। गाँव के बच्चे उन्हें देखकर हँसते, पर कोई उनका दर्द नहीं समझता। बरगद की डाल पर बैठकर वे चुपचाप दूर आसमान देखते और बेहतर दिनों का सपना देखते।