एक छोटे से गाँव में रामू नाम का एक गरीब आदमी रहता था। उसके पास न तो ज़मीन थी और न ही कोई बड़ा काम। वह रोज़ दूसरों के खेतों में मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालता था। हालात बहुत कठिन थे, लेकिन रामू ईमानदार, मेहनती और धैर्यवान था।
एक दिन गाँव में एक बूढ़ा साधु आया। साधु ने रामू की मेहनत और सच्चाई देखकर उसे एक छोटा सा बीज दिया और कहा,
“इसे पूरी लगन से बोना और रोज़ मेहनत करना, सफलता ज़रूर मिलेगी।”
रामू ने उस बीज को अपने घर के पीछे खाली ज़मीन में बो दिया। वह रोज़ उसे पानी देता, देखभाल करता और साथ-साथ मेहनत से मजदूरी भी करता रहा। कुछ समय बाद उस पौधे पर औषधीय फल लगने लगे।
एक दिन शहर से आए एक व्यापारी ने उन फलों को देखा और बताया कि ये बहुत कीमती हैं। व्यापारी ने रामू से फल अच्छे दामों में खरीद लिए। धीरे-धीरे रामू ने उन पैसों से खेती शुरू की, नई चीज़ें सीखी और अपना छोटा सा व्यापार खोल लिया।
सालों की मेहनत के बाद रामू एक सफल और अमीर आदमी बन गया। लेकिन उसने कभी अपनी सादगी और ईमानदारी नहीं छोड़ी। वह गरीबों की मदद करने लगा और गाँव के बच्चों को पढ़ाने में सहयोग देने लगा।