優しい村のおじいさんが迷子の赤ちゃんサルをなぐさめる
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ajju jatav

優しい村のおじいさんが迷子の赤ちゃんサルをなぐさめる

プロンプト
एक गाँव में एक दयालु दादाजी रहते थे। हर सुबह वे अपनी लाठी लेकर जंगल के पास टहलने जाया करते थे। एक दिन उन्हें झाड़ियों से किसी के रोने की आवाज़ आई। दादाजी ने पास जाकर देखा तो एक छोटा-सा बंदर का बच्चा वहाँ बैठा रो रहा था। उसकी आँखों में डर था और वह बहुत भूखा लग रहा था। दादाजी को उस पर दया आ गई। दादाजी ने अपने थैले से एक केला निकाला और प्यार से कहा, “डरो मत बेटा, मैं तुम्हारा दोस्त हूँ।” बंदर के बच्चे ने धीरे-धीरे केला लिया और खाने लगा। थोड़ी देर में वह खुश हो गया और दादाजी के कंधे पर चढ़कर बैठ गया। अब वह रो नहीं रहा था। दादाजी ने उसे पास के बड़े पेड़ तक पहुँचाया। तभी ऊपर से बंदरों का झुंड आया। वह बच्चा खुशी से अपनी माँ के पास चला गया। माँ बंदर ने दादाजी की ओर देखा और जैसे धन्यवाद कहा। अगले दिन से जब भी दादाजी जंगल जाते, बंदर उन्हें फल दे जाते। दादाजी मुस्कुराते और कहते, “प्यार और दया कभी बेकार नहीं जाते।”
Model
PicLumen Art V1
Date created
01/05/26 at 4:58 PM
Seed
7070540913
Guidance Scale
1
Resolution
1024 x 1024 (1:1)

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