एक साइट पर ठेकेदार हरनाम मिस्त्रियों से खूब काम करवाता था, पर पैसे देने में हमेशा बहाने बनाता। मिस्त्री रामू तीन महीने से मेहनत कर रहा था, मगर मज़दूरी नहीं मिली। एक दिन ठेकेदार फिर टालने लगा। तब रामू ने सारे मिस्त्रियों को इकट्ठा किया और काम रोक दिया। पुराने हिसाब-किताब और गवाह सरपंच के सामने रखे गए। ठेकेदार की अकड़ वहीं उतर गई। सबके सामने उसे पूरा पैसा देना पड़ा। उस दिन हरनाम समझ गया कि मिस्त्री को दबाया जा सकता है, लेकिन इंसाफ को नहीं।