सुबह का समय था। सूरज की हल्की रोशनी गली में फैल रही थी। उसी गली में एक धारीदार बिल्ली बड़े आराम से चल रही थी। उसके कदम शांत थे, लेकिन उसकी चाल में एक अलग ही आत्मविश्वास था। ऐसा लग रहा था जैसे वह किसी खास मकसद से निकली हो।
बिल्ली कभी दाएँ देखती, कभी बाएँ। रास्ते में उसे लोग मिले, लेकिन वह बिना रुके आगे बढ़ती रही। एक बच्चा उसे देखकर मुस्कुराया, तो बिल्ली ने हल्की सी पूँछ हिलाई। एक कुत्ता भौंका, पर बिल्ली डरी नहीं। उसने बस एक नज़र डाली और फिर से चल पड़ी।
चलते-चलते वह एक छोटे से पार्क में पहुँची। वहाँ हरी घास थी और ठंडी हवा चल रही थी। बिल्ली ने कुछ पल रुककर चारों तरफ देखा और फिर एक पेड़ के नीचे बैठ गई। उसे लगा कि आज की यह सैर सिर्फ चलना नहीं थी, बल्कि दुनिया को समझने का एक तरीका थी।
उस दिन सबने महसूस किया कि कभी-कभी एक छोटी सी बिल्ली की चाल भी बड़ी कहानी कह जाती है।