एक छोटे से गाँव के पास घना जंगल था। उसी जंगल में एक चंचल बंदर रहता था और गाँव के किनारे एक समझदार कुत्ता। दोनों की मुलाकात एक दिन तब हुई जब बंदर पेड़ से फिसलकर नीचे गिर पड़ा। कुत्ते ने तुरंत दौड़कर उसे संभाला और पूछा, “तुम ठीक तो हो?” बंदर ने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ दोस्त, धन्यवाद!”
धीरे-धीरे दोनों में गहरी दोस्ती हो गई। बंदर फलों से भरी डालियों तक पहुँच जाता और मीठे आम तोड़कर कुत्ते को देता। बदले में कुत्ता गाँव की खबरें और खेतों की रखवाली की बातें उसे सुनाता। एक दिन जंगल में शिकारी आ गए। बंदर ने पेड़ की ऊँचाई से उन्हें देख लिया। उसने तुरंत कुत्ते को इशारा किया। कुत्ते ने जोर-जोर से भौंककर गाँव वालों को सावधान कर दिया। गाँव वाले आ गए और शिकारी भाग गए।
उस दिन दोनों ने समझा कि सच्ची दोस्ती वही है, जहाँ एक-दूसरे की ताकत काम आती है। बंदर की फुर्ती और कुत्ते की वफादारी ने सबको बचा लिया। तब से जंगल और गाँव में उनकी दोस्ती की मिसाल दी जाने लगी।