एक गाँव के पास एक बड़ा सा बरगद का पेड़ था। उसी पेड़ के नीचे एक आदमी, जिसका नाम मोहन था, छोटा सा घर बनाना चाहता था।
जब वह लकड़ियाँ जमा कर रहा था, तभी एक बंदर पेड़ से नीचे उतरा। बंदर ने शरारत करते हुए उसकी लकड़ियाँ इधर-उधर फेंक दीं। मोहन पहले तो गुस्सा हुआ, लेकिन फिर उसने सोचा – “क्यों न इसे दोस्त बना लूँ?”
मोहन ने बंदर को केले दिए और प्यार से कहा, “अगर तुम मदद करोगे तो हम दोनों का घर जल्दी बन जाएगा।” बंदर मान गया।
अब बंदर पेड़ से मजबूत टहनियाँ तोड़कर लाता और मोहन उन्हें जोड़कर दीवार बनाता। बंदर ऊपर चढ़कर पत्तों से छत सजाता, और मोहन नीचे से उसे संभालता। कुछ ही दिनों में बरगद के पास एक सुंदर सा छोटा घर तैयार हो गया।
बारिश आई तो दोनों अंदर बैठकर सुरक्षित रहे। बंदर खुश था कि उसने शरारत छोड़कर मदद की, और मोहन खुश था कि उसे एक सच्चा दोस्त मिल गया।
सीख: मिलजुलकर काम करने से मुश्किल काम भी आसान हो जाता है, और दोस्ती से हर काम में खुशी मिलती है।