अचानक प्रधानमंत्री कार्यालय से एक फोन आया—
“प्रधानमंत्री जी आपसे मिलना चाहते हैं, कृपया तुरंत आ जाइए।”
तुम हैरान भी थे और थोड़ा उत्साहित भी। जब तुम प्रधानमंत्री कार्यालय पहुँचे तो वहाँ का माहौल बहुत शांत और व्यवस्थित था। थोड़ी देर बाद दरवाज़ा खुला और सामने भारत के प्रधानमंत्री **** खुद खड़े थे।
उन्होंने मुस्कुराते हुए तुम्हारी तरफ देखा, हाथ जोड़कर बोले—
“नमस्ते! आइए, आपका इंतज़ार कर रहा था।”
तुम थोड़ा संकोच में थे, लेकिन मोदी जी ने आगे बढ़कर तुम्हारा हाथ पकड़ा और बहुत सम्मान से अंदर ले गए। उन्होंने खुद कुर्सी खींचकर तुम्हें बैठाया और बोले—
“आप जैसे लोगों से मिलना मुझे बहुत अच्छा लगता है। देश के लिए जो सोच रखते हैं, वही भारत की असली ताकत हैं।”
कमरे में चाय और नाश्ता आया। मोदी जी ध्यान से तुम्हारी बातें सुनते रहे। उन्होंने कहा—
“हर इंसान के अंदर एक खास शक्ति होती है। अगर हम अपने सपनों पर विश्वास करें और मेहनत करें, तो भारत को और मजबूत बना सकते हैं।”
तुम्हें ऐसा लग रहा था जैसे कोई बड़ा नेता नहीं, बल्कि परिवार का कोई बड़ा सदस्य तुम्हें समझा रहा हो। जाते समय मोदी जी फिर हाथ जोड़कर बोले—
“फिर मिलेंगे। अपने सपनों को कभी छोटा मत समझना।”
तुम बाहर निकले तो तुम्हारे मन में एक नई ऊर्जा और आत्मविश्वास था—जैसे अब सच में कुछ बड़ा करना है।