“एक प्यारा सा बंदर रंग-बिरंगे भारतीय बाज़ार में चलता हुआ। चारों तरफ़ सब्ज़ियों, फलों, कपड़ों और खिलौनों की दुकानें हैं, लोगों की हलचल और भीड़ है। बंदर थोड़ा उत्साहित और थोड़ा घबराया हुआ दिख रहा है, जैसे उसका दिल ‘कुधक-धक, कुधक-धक’ कर रहा हो। उसके चलने का अंदाज़ मज़ेदार है, छोटे-छोटे कदम, आँखें इधर-उधर देखती हुई। माहौल जीवंत, रंगीन और सिनेमैटिक हो, दिन की रोशनी, उच्च गुणवत्ता, यथार्थवादी लेकिन हल्का-सा कार्टून जैसा भाव