गाँव में एक आदमी था — उसका नाम था रघु।
रघु की एक अजीब आदत थी… वह हर बात में “टेल” चाटता था, मतलब हर किसी की झूठी तारीफ करता था, बस अपना काम निकलवाने के लिए।
गाँव के प्रधान के सामने वह कहता, “आप जैसा समझदार आदमी पूरे इलाके में नहीं!”
दुकानदार से कहता, “आपकी दुकान तो शहर से भी अच्छी है!”
और मालिक से कहता, “आप तो भगवान से कम नहीं!”
धीरे-धीरे लोग समझ गए कि रघु की बातें दिल से नहीं, मतलब से हैं।
एक दिन उसे सच में मदद की जरूरत पड़ी, लेकिन इस बार किसी ने उसकी बात पर भरोसा नहीं किया।
सबने कहा, “जब तुम्हारी हर बात में मतलब था, तो अब तुम्हारी सच्चाई पर कैसे यकीन करें?”
रघु को अपनी गलती समझ आ गई।
उसने फैसला किया कि अब वह सच्ची इज़्ज़त देगा, झूठी तारीफ नहीं।
कहानी की सीख:
👉 झूठी चापलूसी थोड़े समय के लिए काम आती है, लेकिन सच्चा सम्मान हमेशा दिल जीतता है।