Evening prayer lamps glowing on a quiet riverside ghat
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Evening prayer lamps glowing on a quiet riverside ghat

Prompt
एक छोटे से शहर की व्यस्त जिंदगी से दूर, गंगा नदी के किनारे एक प्राचीन घाट था, जहाँ शाम ढलते ही हवा में घंटियों की आवाज और आरती की लय गूंजने लगती थी। दीयों की रोशनी पानी पर झिलमिलाती, मानो नदी खुद हजारों सितारों से सजी हो। अर्जुन अब एक सफल इंजीनियर था। पत्नी और दो छोटे बच्चों के साथ उसका जीवन खुशहाल था, लेकिन रातों में एक पुरानी याद उसे चैन नहीं लेने देती—उसकी कॉलेज की सबसे करीबी दोस्त प्रिया की। कॉलेज के दिनों में दोनों अविभाज्य थे। सुबह कैंटीन में चाय पीते, क्लास बंक करके इस घाट पर आते, कागज की नावें बनाकर नदी में छोड़ते और देर रात तक सपनों की बातें करते। प्रिया कहती, “अर्जुन, एक दिन हम दोनों दुनिया घूमेंगे, बस हम दोनों।” लेकिन एक छोटी-सी गलतफहमी—एक अधूरी बात, एक गुस्से में कही गई बात—ने सब कुछ बदल दिया। दोनों ने बात करना बंद कर दिया। प्रिया शहर छोड़कर चली गई, अर्जुन ने भी चुप्पी साध ली। साल बीत गए। अर्जुन की शादी हो गई, और उसे पता चला कि प्रिया की भी शादी हो चुकी है। हर शाम अर्जुन अकेले में सोचता, “मुझे पहले बात करनी चाहिए थी। सिर्फ एक बार माफी माँग लेता तो शायद...” एक शाम, ठीक कार्तिक पूर्णिमा के दिन, अर्जुन परिवार के साथ घाट पर आया। बच्चे दीये जलाने में मस्त थे, पत्नी आरती देख रही थी। दूर घंटियाँ बज रही थीं, पंडित जी मंत्र पढ़ रहे थे, सैकड़ों दीये नदी पर तैर रहे थे। सूरज डूबने की लालिमा पानी पर फैल रही थी। अचानक अर्जुन की नजर घाट की सबसे आखिरी सीढ़ी पर पड़ी। वहाँ एक महिला अकेली बैठी थी, हाथ में एक दीया लिए, नदी को देख रही थी। उसकी साड़ी हवा में लहरा रही थी, चेहरे पर वही पुरानी मुस्कान, लेकिन आँखों में गहरी उदासी। वह प्रिया थी! अर्जुन का दिल जोर से धड़का। पैर खुद-ब-खुद आगे बढ़े। परिवार थोड़ा दूर था। वह प्रिया के पास जाकर चुपचाप बैठ गया। प्रिया ने मुड़कर देखा। पहले तो उसकी आँखें चौड़ी हो गईं, फिर नम। वह गुस्से और दर्द से भरी नजरों से देखने लगी। धीरे से बोली, “अर्जुन... इतने साल बाद? तुम्हें तो पहले आना चाहिए था न? हम कितनी मस्ती करते थे—यहीं इसी घाट पर दीये छोड़ते, नावें दौड़ाते, कहते थे कि जो नाव सबसे दूर जाएगी, उसकी मनोकामना पूरी होगी। लेकिन तुमने एक बार भी फोन नहीं किया, मैसेज नहीं किया।” अर्जुन की आवाज काँप गई। “प्रिया, मैं रोज सोचता था। डरता था कि तुम और नाराज हो जाओगी। लेकिन आज... आज मैं चुप नहीं रह सकता। मुझे माफ कर दो। मैंने बहुत बड़ी गलती की।” प्रिया खड़ी हुई, मानो चली जाएगी। आँसू उसके गालों पर लुढ़क रहे थे। उसने पीठ फेरी, लेकिन रुक गई। दूर आरती की लय तेज हो रही थी, घंटियाँ जोरों से बज रही थीं। अचानक प्रिया मुड़ी और बोली, “अब बहुत देर हो चुकी है अर्जुन। मेरी शादी हो चुकी है, मेरा भी अपना परिवार है। लेकिन ये यादें... ये दीयों की तरह आज भी जल रही हैं।” अर्जुन ने हाथ जोड़े। “बस एक आखिरी बार... पुरानी दोस्ती को इन दीयों के साथ नदी में अलविदा कह दें
Model
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Date created
01/04/26 at 9:30 AM
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Resolution
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