Lonely figure sitting beneath a village peepal tree
Prompt
पीपल के पेड़ तले, मैं आज भी बैठा हूँ,
तेरी परछाईं ढूँढूँ, पर तुझसे ही बिछड़ा हूँ।
गाँव की गलियों में, अब सन्नाटा सा है,
जहाँ हँसी थी तेरी, अब बस साया सा है।
ओ मेरे साथी, तू क्यों चला गया,
इस भूखी दुनिया में, मुझे तन्हा छोड़ गया।
घंटी की हर आवाज़, तेरा नाम पुकारे,
दो बंदरों की दोस्ती, वक़्त ने क्यों हारे।
Negative Prompt
NSFW, watermarkपीपल के पेड़ तले, मैं आज भी बैठा हूँ,
तेरी परछाईं ढूँढूँ, पर तुझसे ही बिछड़ा हूँ।
गाँव की गलियों में, अब सन्नाटा सा है,
जहाँ हँसी थी तेरी, अब बस साया सा है।
ओ मेरे साथी, तू क्यों चला गया,
इस भूखी दुनिया में, मुझे तन्हा छोड़ गया।
घंटी की हर आवाज़, तेरा नाम पुकारे,
दो बंदरों की दोस्ती, वक़्त ने क्यों हारे।