एक शहर में दो बंदर रहते थे। लोग उन्हें प्यार से मोती और चिंटू कहते थे। दोनों रोज़ सड़कों पर लोगों के सामने करतब दिखाते थे ताकि कुछ खाने को मिल जाए। कई लोग उन्हें केले और रोटियाँ दे देते, लेकिन कुछ लोग उन्हें भगा देते।
एक दिन पूरे दिन उन्हें कुछ भी खाने को नहीं मिला। शाम को एक बूढ़ा भिखारी खुद भूखा था, फिर भी उसने अपनी एकमात्र रोटी दोनों बंदरों में बाँट दी।
बंदरों ने रोटी खाई और अगले दिन से वे रोज़ उस बूढ़े के पास आने लगे। वे उसके साथ बैठे रहते, उसे हँसाते और उसका साथ देते।
एक दिन बूढ़ा बहुत बीमार हो गया। दोनों बंदर उसके पास से हटे नहीं। यह देखकर आसपास के लोगों की आँखों में आँसू आ गए। सबने मिलकर बूढ़े का इलाज करवाया और उसके रहने व खाने का इंतज़ाम कर दिया।
उस दिन लोगों को समझ आया कि जानवर भी प्यार, वफ़ादारी और एहसान मानना जानते हैं।