एक घने जंगल में एक नन्हा बंदर रहता था, उसका नाम था चिंटू। चिंटू बहुत शरारती था, लेकिन उसका दिल बहुत साफ था। वह पूरे दिन पेड़ों से झूलता, आम तोड़ता और अपने दोस्तों को परेशान करता रहता था।
एक दिन जंगल में तेज आँधी आई। पेड़ हिलने लगे, पक्षियों के घोंसले टूटकर नीचे गिर गए। चिंटू ने देखा कि एक छोटा सा चिड़िया का बच्चा जमीन पर गिरा हुआ है और डर के मारे काँप रहा है।
पहले तो चिंटू हँसा, लेकिन फिर उसे अपनी माँ की बात याद आई —
"बेटा, दूसरों की मदद करना सबसे बड़ा काम होता है।"
चिंटू तुरंत नीचे उतरा। उसने बहुत सावधानी से चिड़िया के बच्चे को उठाया और पेड़ पर चढ़कर उसका घोंसला ठीक करने लगा। आँधी अभी भी चल रही थी, लेकिन चिंटू ने हार नहीं मानी।
थोड़ी देर बाद उसने घोंसला सही कर दिया और चिड़िया के बच्चे को सुरक्षित रख दिया। चिड़िया की माँ वापस आई और चिंटू को धन्यवाद कहा।
उस दिन के बाद जंगल के सभी जानवर चिंटू को सिर्फ शरारती बंदर नहीं, बल्कि बहादुर और दयालु बंदर कहने लगे।