Hungry monkey stealing a shiny fish at busy market
提示词
🐒 कहानी: “मछली चोर बंदर”
एक पुराना सा मछली बाज़ार था, जहाँ सुबह-सुबह बड़ी रौनक रहती थी। उसी बाज़ार के पास जंगल में कुछ बंदर रहते थे, जो धीरे-धीरे इंसानों की तरह चलना, इशारे करना और कपड़े पहनना सीख गए थे।
उनमें से एक बंदर था — कालू।
कालू इंसानों जैसा दिखता था:
फटे-पुराने कपड़े
आधी फटी शर्ट
घुटनों से फटी पैंट
चेहरे पर चालाक मुस्कान
एक दिन कालू को बहुत ज़ोर की भूख लगी। वह दो पैरों पर चलकर मछली बाज़ार पहुँचा। चारों तरफ़ ताज़ी मछलियों की खुशबू फैली हुई थी। दुकानदार किसी और से बात कर रहा था।
कालू ने इधर-उधर देखा…
धीरे से हाथ बढ़ाया…
और एक बड़ी चमकदार मछली उठाकर भागने लगा! 🐟💨
दुकानदार चिल्लाया,
“अरे! बंदर! चोर!”
लेकिन कालू फटे कपड़ों में हँसता हुआ गलियों में गायब हो गया।
बाज़ार वाले आज भी उसे “मछली चोर बंदर” कहते हैं।