Two men walking together on a dusty village road at sunset
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। गाँव की लंबी कच्ची सड़क पर हल्की-हल्की धूल उड़ रही थी। खेतों से सरसों की खुशबू आ रही थी और दूर सूरज ढल रहा था। उसी रास्ते पर दो लोग साथ-साथ चल रहे थे — एक था अर्जुन, जो शहर से आया था और खुद को खुले दिल से “गे” कहने में गर्व महसूस करता था। दूसरा था मोहन, गाँव का सीधा-सादा किसान।
अर्जुन पहली बार गाँव आया था। शहर की भागदौड़ से दूर उसे यहाँ सुकून मिला। मोहन से उसकी मुलाकात हाट बाज़ार में हुई थी। बातचीत शुरू हुई तो पता चला कि दोनों को संगीत और खुली हवा में घूमना बहुत पसंद है।
उस दिन दोनों खेतों के बीच वाली सड़क पर टहल रहे थे।
“तुम्हें गाँव कैसा लग रहा है?” मोहन ने मुस्कुराते हुए पूछा।
“बहुत अच्छा… यहाँ लोग दिल से जीते हैं,” अर्जुन ने जवाब दिया।
मोहन ने हल्की हँसी के साथ कहा, “दिल से जीना ही असली ज़िंदगी है। चाहे शहर हो या गाँव, इंसान को खुद जैसा है, वैसा ही रहना चाहिए।”
अर्जुन को यह बात बहुत अच्छी लगी। उसने महसूस किया कि मोहन उसे बिना किसी झिझक या सवाल के स्वीकार कर रहा है। दोनों चलते-चलते खेतों