एक बार की बात है, एक घने जंगल में मीठू नाम का एक छोटा बेबी बंदर रहता था। वह बहुत शरारती था और हर चीज़ को खेल समझकर छेड़ देता था।
एक दिन मीठू ने देखा कि कुछ जानवर नदी के किनारे पानी पी रहे हैं। उसने सोचा —
"अगर मैं भी नदी में कूदूँ तो कितना मज़ा आएगा!"
उसकी माँ ने उसे समझाया,
"मीठू, अभी तुम छोटे हो। नदी का पानी गहरा है, अकेले मत जाना।"
लेकिन मीठू नहीं माना।
वह पेड़ से कूदा और सीधे नदी में जा गिरा!
पानी तेज़ था, और मीठू डर गया — “माँ! माँ!”
तभी एक कछुआ वहाँ से गुज़रा। उसने तुरंत मीठू को अपनी पीठ पर बैठाया और किनारे तक पहुँचा दिया।
मीठू बहुत शर्मिंदा हुआ। उसने माँ से कहा,
“माँ, अब मैं आपकी बात मानूँगा। आगे से बिना सोचे कुछ नहीं करूँगा।”
माँ मुस्कुराई और बोली,
“यही तो समझदारी है, मीठू।”
उस दिन से मीठू ने शरारत तो की, पर सोच-समझकर।