Alter Bauer geht allein durch einen stillen Dorfgarten
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एक छोटे से गांव में एक बूढ़ा किसान अपनी पुरानी गाय के साथ रहता था। उसकी ज़िंदगी बहुत साधारण थी, लेकिन वह गाय उसके लिए किसी परिवार के सदस्य जैसी थी। एक दिन, उस गाय ने अचानक ज़मीन पर गिरकर दम तोड़ दिया। किसान बहुत दुखी हुआ, लेकिन उसने हार नहीं मानी। उसने उसी गाय के लिए एक छोटा सा बगीचा बनाया, जहाँ वह रोज़ जाता और उसकी याद में फूल लगाता। धीरे-धीरे वह बगीचा गांव का एक प्यारा सा ठिकाना बन गया, जहाँ लोग शांति और प्रेरणा लेने आते थे। उस किसान ने सिखाया कि प्यार और समर्पण किसी भी नुकसान से बड़ा होता है, और यादों का बगीचा हमेशा खिलता रहता है।