Junge Braut, die allein auf einer ruhigen Abendstraße geht
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नई-नई शादी हुई दुल्हन बस से उतरकर अपने ससुराल की ओर जा रही थी। रास्ता सुनसान था और शाम होने वाली थी। तभी सड़क किनारे खड़े एक अंधे फ़कीर ने उसे आवाज़ दी।दुल्हन जल्दी में थी, लेकिन उसने दया दिखाते हुए फ़कीर का हाथ पकड़ा और उसे सुरक्षित सड़क पार करा दिया।दुल्हन हैरान रह गई। उसे समझ नहीं आया कि फ़कीर ने ऐसा क्यों कहा। वह अपने ससुराल पहुँच गई, लेकिन फ़कीर की बात उसके मन में बार-बार घूमती रही।रात होते ही अचानक...
ठक... ठक... ठक...
घर के दरवाज़े पर किसी ने ज़ोर से दस्तक दी...