Fröhlicher Affe in Jeans spielt draußen im tiefen Schnee
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एक बार की बात है, एक गाँव में एक प्यारी सी दादी रहती थीं। उनके साथ उनका एक अनोखा दोस्त रहता था—एक शरारती बंदर! वह बंदर आम बंदरों जैसा नहीं था; वह इंसानों की तरह जींस, एक सुंदर सी शर्ट और पैरों में चमकीले जूते पहनता था। जब भी वह चलता, उसके जूतों से टप-टप की आवाज़ आती थी।
एक दिन गाँव में बहुत भारी बर्फबारी हुई। चारों तरफ बर्फ की सफेद चादर बिछ गई। यह देखकर बंदर खुशी से उछल पड़ा। उसने अपने जूतों के फीते कसे और दादी का हाथ पकड़कर उन्हें बाहर ले आया।
बंदर ने अपनी जीभ से बर्फ को छुआ और दादी से इशारा करके कहा, "दादी, क्यों न हम इस बर्फ से अपना एक नया घर बनाएं?"
दादी मुस्कुराईं और बोलीं, "हाँ बेटा, चलो आज हम 'इग्लू' (Barf ka Ghar) बनाते हैं!"