Écureuil dévoué aidant le pont de pierre au bord de la mer
Prompt
राम सेतु निर्माण के समय जब विशाल वानर सेना बड़े-बड़े पत्थर समुद्र में डालकर पुल बना रही थी, तभी एक नन्ही सी गिलहरी भी अपने छोटे-से शरीर से सेवा में जुट गई। वह बार-बार समुद्र किनारे जाती, अपनी देह पर रेत लपेटती और फिर पत्थरों के बीच की छोटी-छोटी दरारों में वह रेत भर देती, ताकि पुल मजबूत बन सके। 🐿️🌊
वानर उसे देखकर हंसने लगे और बोले कि इतने छोटे प्रयास से क्या होगा। लेकिन राम ने गिलहरी का समर्पण देखा और समझा कि सेवा का मूल्य आकार से नहीं, भावना से होता है। उन्होंने प्रेम से गिलहरी को अपने हाथों में उठाया, उसकी पीठ पर स्नेह से उंगलियां फेरीं और कहा कि तुम्हारा योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना बड़े पत्थर उठाने वालों का। 🙏✨
कहते हैं तभी से गिलहरी की पीठ पर तीन सुंदर धारियां बन गईं, जो आज भी उसके समर्पण, भक्ति और छोटे प्रयासों की बड़ी महत्ता की याद दिलाती हैं। 🐿️💛