Contadino povero che lavora da solo nel suo piccolo campo all’alba
Prompt
एक गरीब किसान हर सुबह सूरज निकलने से पहले अपने खेत में काम करने चला जाता है। उसके पास ज़्यादा ज़मीन नहीं है, लेकिन वही उसकी रोज़ी-रोटी का सहारा है। वह अपने पुराने औज़ारों से खेत जोतता है और बीज बोता है, उम्मीद करता है कि इस बार फसल अच्छी होगी। तेज धूप, बारिश और ठंडी हवा—हर मौसम में वह बिना रुके मेहनत करता है।
उसकी जिंदगी आसान नहीं है। कभी पानी की कमी, तो कभी फसल खराब होने का डर उसे सताता रहता है। फिर भी वह हार नहीं मानता। अपने परिवार के लिए वह दिन-रात मेहनत करता है, ताकि उनके चेहरे पर मुस्कान बनी रहे।
शाम को थका हुआ किसान जब घर लौटता है, तो उसकी आँखों में उम्मीद होती है कि उसकी मेहनत एक दिन ज़रूर रंग लाएगी। यही उम्मीद उसे हर दिन फिर से खेत में काम करने की ताकत देती है।