Orgulloso campesino de pie en los campos bajo un sol intenso
Prompt
अन्नदाता: माटी का वीर
कड़कती धूप हो या शीतल लहर का वार,
खेतों में खड़ा रहता है, खुशियों का आधार।
मिट्टी से सोना उगाने का, उसमें अनोखा हुनर है,
पसीने से सींचता जिसे, वह उसका ही घर है।
न मखमल की चाहत, न विश्राम की आस,
धरती माँ की सेवा ही, उसका सच्चा विश्वास।
फटे लिबास और नंगे पाँव, पर माथे पर गौरव है,
सारे जग का पेट भरता, यह उसका ही वैभव है।
अन्नदाता की मेहनत से ही, हर घर में दीवाली है,
उसके बिना तो यह दुनिया, सूनी और खाली है।
हे किसान! तुझको नमन, तू ही असली भगवान है,
तेरी सादगी और साहस ही, मेरे देश की पहचान है।