Niña pobre de un pueblo estudiando de noche bajo una farola
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एक छोटे से गाँव में रानी नाम की एक गरीब लड़की रहती थी। उसके पिता मजदूरी करते थे और माँ लोगों के घरों में काम करती थीं। घर की हालत बहुत खराब थी। कई बार ऐसा होता कि रात को खाने के लिए सिर्फ सूखी रोटी ही मिलती।
रानी पढ़ना चाहती थी, लेकिन उसके पास स्कूल की फीस भरने के पैसे नहीं थे। फिर भी वह हार नहीं मानती थी। वह गाँव के सरकारी स्कूल में जाती और पुराने फटे हुए किताबों से पढ़ाई करती। रात को बिजली नहीं होती, तो वह सड़क के खंभे की रोशनी में बैठकर पढ़ती।
गाँव के लोग उसका मज़ाक उड़ाते और कहते, “गरीब की बेटी क्या बड़ा करेगी?” लेकिन रानी चुपचाप मेहनत करती रही।
एक दिन स्कूल में परीक्षा हुई। रानी ने पूरे जिले में पहला स्थान हासिल किया। यह खबर सुनकर सब लोग हैरान रह गए। स्कूल के प्रिंसिपल ने उसकी मदद की और आगे की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति दिलवाई।
रानी ने दिन-रात मेहनत की और बड़ी होकर डॉक्टर बन गई। अब वह अपने गाँव के गरीब लोगों का मुफ्त इलाज करती थी। जो लोग कभी उसका मज़ाक उड़ाते थे, वही आज उसकी तारीफ करते थे।
रानी हमेशा कहती थी —
“गरीबी इंसान की मजबूरी हो सकती है, लेकिन सपनों को कभी छोटा नहीं बना सकती।”