यह एक सच्ची लगने वाली छोटी सी प्रेम कहानी है:
राहुल और प्रिया की मुलाकात कॉलेज की लाइब्रेरी में हुई थी। राहुल हमेशा चुप रहने वाला लड़का था, जबकि प्रिया बहुत हंसमुख और मिलनसार थी। शुरुआत में दोनों सिर्फ किताबों के बारे में बात करते थे, लेकिन धीरे-धीरे उनकी बातें लंबी होने लगीं।
एक दिन प्रिया ने पूछा, “तुम इतने चुप क्यों रहते हो?” राहुल मुस्कुराकर बोला, “शायद सही इंसान का इंतज़ार था।” यह सुनकर प्रिया थोड़ा शर्मा गई।
समय के साथ उनकी दोस्ती गहरी हो गई। वे साथ पढ़ते, चाय पीते और अपने सपनों के बारे में बात करते। लेकिन पढ़ाई खत्म होने के बाद प्रिया को दूसरे शहर जाना पड़ा। दूरी ने सब कुछ बदल दिया, लेकिन उनका प्यार नहीं।
हर दिन फोन पर बात करना, एक-दूसरे को याद करना—यही उनकी जिंदगी बन गया। दो साल बाद, जब प्रिया वापस आई, राहुल उसी लाइब्रेरी में उसका इंतज़ार कर रहा था।
इस बार उसने चुप नहीं रहा—उसने प्रिया का हाथ पकड़कर कहा, “अब कहीं मत जाना।”