एक जंगल में एक खरगोश रहता था। वह बहुत तेज दौड़ता था और अपनी गति पर घमंड करता था।
एक दिन उसकी मुलाकात एक छोटे चूहे से हुई। खरगोश ने चूहे का मजाक उड़ाया और कहा, "तुम इतने छोटे हो, मेरे किसी काम के नहीं हो।"
चूहे ने मुस्कुराकर कहा, "कभी-कभी छोटा दोस्त भी बड़े काम आता है।"
कुछ दिनों बाद खरगोश एक शिकारी के जाल में फँस गया। वह बहुत कोशिश करता रहा, लेकिन निकल नहीं पाया।
तभी चूहा वहाँ आया। उसने अपने तेज दाँतों से जाल काटना शुरू किया और थोड़ी देर में खरगोश को आजाद कर दिया।
खरगोश को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने चूहे से माफी मांगी और दोनों अच्छे दोस्त बन गए।
सीख: किसी को छोटा या कमजोर समझकर उसका मजाक नहीं उड़ाना चाहिए।