सुबह-सुबह एक शरारती बंदर ने नीली जींस, लाल टी-शर्ट, छोटी-सी टोपी और काला चश्मा पहन लिया। हाथ में कपड़े का थैला उठाकर वह बड़े स्टाइल से सब्ज़ी मंडी की ओर निकल पड़ा। रास्ते में लोग उसे देखकर मुस्कुरा रहे थे। कोई कह रहा था, "अरे वाह! आज तो बंदर बाबू पूरे शहर के हीरो लग रहे हैं!"
मंडी पहुँचकर बंदर एक सब्ज़ी वाले के पास गया और बोला, "भैया, एक किलो केले, दो किलो टमाटर और थोड़ा पालक देना।" सब्ज़ी वाला हँसते हुए सब्ज़ियाँ तौलने लगा। तभी पीछे खड़ा एक शरारती बकरा बंदर का थैला खींचकर भाग गया।
बंदर गुस्से से चिल्लाया, "अरे! मेरा थैला वापस करो!" और बकरे के पीछे दौड़ पड़ा। बकरा गलियों में भागा, बंदर उसके पीछे। रास्ते में लोग इधर-उधर हटने लगे। सब्ज़ियाँ हवा में उछलने लगीं, टमाटर लुढ़कने लगे और पूरा बाज़ार हँसी से गूँज उठा।
आख़िरकार बंदर ने लंबी छलांग लगाकर बकरे को पकड़ लिया और अपना थैला वापस ले लिया। लेकिन तभी दोनों में ज़ोरदार बहस शुरू हो गई। बकरा बोला, "मैं तो मज़ाक कर रहा था!" बंदर बोला, "ऐसा मज़ाक किसी के साथ नहीं करते!"
यह देखकर सब्ज़ी वाला बीच में आया और दोनों को समझाया। दोनों ने एक-दूसरे से माफ़ी माँगी और हाथ मिलाया। बंदर ने अपनी सब्ज़ियाँ उठाईं, सबको मुस्कुराकर धन्यवाद कहा और खुशी-खुशी घर लौट गया।