जब वह छोटा था, तो उसे लगता था कि खुशी का मतलब है सबसे ऊँचा होना और सबसे मीठे फल देना। वह दिन-भर सूरज की रोशनी बटोरता और अपनी जड़ों से खूब पानी खींचता। जब पहली बार उसकी डालियों पर लाल-लाल सेब आए, तो उसे बड़ी गर्व की अनुभूति हुई। बच्चे दौड़ते हुए आते और उसके फल तोड़कर खाते। उनकी हंसी सुनकर पेड़ का रोम-रोम खिल उठता।