एक घने जंगल के बीचों-बीच एक शांत आश्रम था, जहाँ एक साधु रहते थे। उनका नाम था स्वामी दयानंद। वे बहुत सरल और ज्ञानी व्यक्ति थे। दूर-दूर से लोग उनसे ज्ञान लेने और अपने दुखों का समाधान पाने आते थे।
एक दिन एक युवा लड़का उनके पास आया। वह बहुत परेशान था। उसने साधु से कहा, “गुरुदेव, मेरे जीवन में बहुत समस्याएँ हैं। मैं जितनी मेहनत करता हूँ, उतनी ही परेशानियाँ बढ़ती जाती हैं। मुझे समझ नहीं आता कि क्या करूँ।”
साधु मुस्कुराए और उसे जंगल के अंदर ले गए। वहाँ एक छोटा-सा पौधा था, जो पत्थरों के बीच उग रहा था। साधु ने पूछा, “तुम्हें यह पौधा कैसा लग रहा है?”
लड़के ने कहा, “गुरुदेव, यह तो बहुत कमजोर लग रहा है। इतने पत्थरों के बीच यह कैसे बड़ा होगा?”
साधु बोले, “ध्यान से देखो।”
लड़के ने गौर से देखा तो पाया कि पौधा धीरे-धीरे पत्थरों के बीच से रास्ता बनाकर ऊपर की ओर बढ़ रहा था।
साधु ने समझाया, “यह पौधा भी कठिनाइयों में है, लेकिन यह हार नहीं मानता। यह हर दिन थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ता है। जीवन में समस्याएँ पत्थरों की तरह होती हैं, लेकिन अगर हम धैर्य और मेहनत से काम लें, तो हम भी अपना रास्ता बना सकते हैं।”
लड़के को बात समझ आ गई। उसने साधु को प्रणाम किया और नए उत्साह के साथ अपने जीवन की ओर लौट गया।
सीख:
कठिनाइयाँ हमें रोकने नहीं, बल्कि मजबूत बनाने के लिए आती हैं। धैर्य और निरंतर प्रयास से हर समस्या का हल निकल सकता है।