एक सुंदर जंगल में एक मोर रहता था।
वह अपने रंग-बिरंगे पंख फैलाकर रोज नाचता था और अपनी सुंदरता पर बहुत घमंड करता था।
एक दिन आसमान में एक तेज़ बाज उड़ता हुआ आया।
मोर हंसकर बोला,
“अरे बाज! तुम्हारे पंख तो बिल्कुल साधारण हैं। मेरी तरह सुंदर बनो।”
बाज मुस्कुराकर बोला,
“मोर भाई, केवल सुंदरता ही सब कुछ नहीं होती। हिम्मत और ताकत भी जरूरी होती है।”
इतने में जंगल में एक शिकारी आ गया।
शिकारी को देखकर मोर डर गया।
वह ऊंचा उड़ नहीं पाया और इधर-उधर छिपने लगा।
लेकिन बाज तुरंत आसमान में ऊंचा उड़ गया।
फिर उसने नीचे आकर मोर को भी पेड़ के पीछे छिपा दिया।
मोर को अपनी गलती समझ आ गई।
उसने शर्मिंदा होकर कहा,
“आज मुझे समझ आया कि असली महानता सुंदरता में नहीं, बल्कि बहादुरी और दयालुता में होती है।”